Insulating material and Dielectrics

Insulating material(कुचालक पदार्थ):- कुचालक पदार्थों में free electrons की संख्या बहुत कम या नहीं के बराबर होती हैं। अतः वोल्टेज लगाने पर, इनमे से current(धारा) प्रवाह नहीं होता हैं।  इन पदार्थो का विशिष्ट  प्रतिरोध 106 Ω से अधिक  क्रम का होता हैं।
Dielectric Material (परावैधुत):- Dielectric (परावैधुत) insulator (कुचालक) पदार्थ होते हैं। परंतु Dielectric का मुख्य कार्य विधुत ऊर्जा को store करना हैं, जबकि insulator धारा को रोकने के लिए स्तेमाल किया जाता हैं। अतः वे कुचालक, जो बाहरी वैधुत क्षेत्र लगाने पर ध्रुवित हो जाते हैं, केवल वही कुचालक पदार्थ परावैधुत कहलाते हैं। अतः सभी dielectric मे insulators के गुण होते हैं परन्तु सभी insulator में dielectric के गुण नही होते हैं।
कुचालक या परावैधुत पदार्थ के गुण :-

  • कुचालक पदार्थो का विशिष्ट प्रतिरोध लगभग 106 Ω से  भी अधिक होता है।
  • Dielectric Strength:- विधुतरोधी  पदार्थ द्वारा सहन की जाने वाली वोल्टेज को dielectric strength कहते हैं। इसे किलोवोल्ट प्रति मिमी (KV/mm) मात्रक में व्यक्त किया जाता है। 
  • Dielectric Constant;- यह  परावैधुत पदार्थ की निरपेक्ष विधुतशीलता तथा वायु पदार्थ की विधुतशीलता का अनुपात है। इसे εr  संकेताक्षर से व्यक्त करते है। यह एक मात्रक  रहित राशि है, जिसका मान सदैव एक से अधिक रहता है। 
  • परावैधुत हानि:- विधुत क्षेत्र लगाने पर परावैधुत पदार्थ द्वारा उत्सर्जित ऊर्जा को परावैधुत हानि कहते हैं।
परावैधुत की हानि:-

  • Leakage current (क्षरण धारा):- high voltage लगाने पर परावैधुत पदार्थ मे से बहुत कम मात्र की धारा बहने लगती है। इसे क्षरण धारा कहते हैं।
  • Ionization (आयनीकरण):- वोल्टेज apply करने के से dielectric में कुछ bond टूटने के कारण कुछ free electrons उत्पन्न होते हैं। इसके कारण होने वाली हानि को आयनीकरण हानि कहते हैं।
  • Heterogeneity structure (अनियमित सारंचना):- यदि dielectric में अशुद्धि मिली हो या dielectric की मोटाई, सभी जगह पर बराबर न हो, तब भी dielectric में धारा प्रवाह से हानि होती है।
  • धुर्विकरण (polarization) के कारण भी dielectric में हानि होती है।
आदर्श विधुतरोधी पदार्थ के गुण:
  • मुक्त electrons की संख्या शून्य होनी चाहिए।
  • प्रतिरोधकता अनन्त होनी चाहिए।
  • चालकता शून्य होनी चाहिए।
  • Mechanical strength और Thermal strength अति उच्च होनी चाहिए।
  • परावैधुत हानि शून्य होनी चाहिए।
  • रासायनिक रूप से शुद्ध होना चाहिए।
  • ऊष्मा एवं रसायन से प्रभाव मुक्त होना चाहिए।
  • Fire proof होना चाहिए।
  • Water proof  होना चाहिए।
  • Valency electrons (संयोजी) की संख्या 7 होनी चाहिए।

Various type of insulating materials:

(1)- Mica (माइका या अब्रक):- यह magnesium, aluminium, तथा sodium potash के silicate के मिश्रण से बना खनिज पदार्थ है। इस पर तेलीय पदार्थ, गैस और नमी का कोई प्रभाव नहीं होता है और इसका परावैधुतांक भी उच्च (4.5 से 7) है। इसकी breakdown वोल्टेज 4 × 107 से अधिक है। माइका में पावर लॉस भी कम होता है।
  • माइका की पत्तियाँ electric machines में commutator segments के बीच insulation के लिए use होती हैं।
  • यह भट्टियों और कैपेसिटर में insulation के लिए use होता है।
  • इलैक्ट्रिक मोटर में coils(कुंडली) की taping के लिए भी इसका use किया जाता है।
(2)- Glass (काँच):- यह थर्मोप्लास्टिक ओर्गेनिक पदार्थ है तथा इसमे ग्लास निर्मित करने वाला मूल ओक्साइड़ सिलिकन (SiO2) है। इसके विधुत एव भोतिक अभिलक्षण उच्च होते हैं। 
  • 200°C पर इसका आयतन प्रतिरोध 1x1017 ohm cm से अधिक होता है और इसकी  रसायनिक प्रतिरोधकता उच्च होती है। यह अत्यन्त भंगुर (Brittle) पदार्थ है। 
  • इसका परावैधुतांक 3.8 से अधिक होता है। 
  • ग्लास पर हवा तथा पानी का असर नहीं होता है और यह तापमान के बदलाव को सहन कर सकता है। 
Application:- टफ किया गया ग्लास high voltage (100 kV से अधिक) लाइनों के insulation के लिए प्रयोग किया जाता है। कई कार्यो में insulation के लिए ग्लास फायबर टेप का प्रयोग होता है। हरमिटिक capacitors मे शील्ड लीड्स को बनाने के लिए ग्लास का प्रयोग किया जाता है।

(3)-पोलिविनाइल क्लोराइड (PVC):-  यह एक प्रकार का प्लास्टिक है जोकि HCL, lime stone और प्राकर्तिक गेसों द्वारा बनाया जाता है। PVC दृढ़(rigid) एवं flaxible दो प्रकार के होते है। इस पर वायु, प्रकाश तथा पानी का प्रभाव नही पड़ता है, परंतु 80°C से ऊपर यह नर्म (soft) हो जाता है।  इसका insulation प्रतिरोध 1012 से 1013 तक और परावैधुतांक क्षमता 30 kV mm से 50 kV mm तक होती है।

  • बिजली की तारों पर PVC की जेकेट होती है। 
  • बिजली की मोटरों मे stator और field winding के बीच मे insulation के लिए PVC film का प्रयोग होता है। 
  • बिजली के तारों के जोड़ का insulation करने के लिए PVC टेप का व्यापक रूप से use होता है। 
(4)- Silicon:- Silicon धरती मे आसानी से उपलब्ध होने वाला पदार्थ है। साधारणतः यह silicon-dioxide के रूप मे उपलब्ध होता है, जैसे की रेत, agate, क्रिस्टल आदि सामान्य तापमान पर यह ठोस होता है, इसका dielectric constant 11.7, और melting point 1412°C हैं।
  • Silicon को doping करके semiconductor device बनाने के लिए use किया जाता है। 
  • काँच बनाने के लिए सिलिकॉन को रेत के रूप मे प्रयोग किया जाता है। 
  • computer chep बनाने मे सिलिकॉन का use होता है। 
  • Silicon का use ईंट बनाने के लिये भी किया जाता है।
  • सिलिकॉन implant के लिये चिकित्सा क्षेत्र मे प्रयोग किया जाता है। 
(5)- रबर:- प्रकर्तिक रूप से जो रबर पायी जाती हैं उसे कच्ची रबर (raw rubber) कहते हैं। कच्ची रबर भंगुर होती है। अतः साधारण अवस्था मे इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता है। रबर को स्तेमाल के लिये वुल्केनाइज़ेशन process से गुजरना पड़ता है। 
  • रबर का प्रयोग 55°C से कम तापमान तक ही किया जा सकता है। 
  • इसका volume resition 1 × 1014 Ω cm से अधिक होता है।
  • Dielectric constant = 2.5 to 5
  • रबर मे 30% सल्फर मिलाने पर उत्तम insulating पदार्थ प्राप्त होता है। 
  • रबर नमी, वायु एवं ठंड के प्रति प्रतिरोधी होता है। 
(6)- Bakelite:- यह एक early plastic है। यह एक प्रकार का phenol-formaldehyde resin है। Bakelite, acid proof, heat proof, और rigid होता है। इसका परावैधुतांक 5 से 7 है, जबकि breakdown potential 6 से 15 kV/mm है।
  • Bakelite का प्रयोग मशीन के पुर्जे, electric material के parts बनाने के लिये किया जाता है।
  • इसका प्रयोग electronic equipments के कवर और कैबिनेट बनाने के लिये भी किया जाता है।
(7)- Ceramic:-  यह दो से अधिक तत्वों से मिलकर बना होता है। साधारणतः इसे clay, earthen elements, और जल के मिश्रण को भट्टियों मे उच्च तापमान पर गर्म करके बनाया जाता है।  यह अत्यधिक कठोर होता है और इसका insulation प्रतिरोध उच्च होता है। Ceramic आक्सीकरण-रोधी (Oxidation resistance) होता है और इस पर रसायनो का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

  • Ceramic का प्रयोग थर्मल insulator और विधुत insulator बनाने के लिये किया जाता है।
  • घर की फर्श मे ceramic की टाइल्स का प्रयोग किया जाता है। 
  • वायुयान और मोटर वाहन के स्पार्क प्लग मे ceramic insulator का प्रयोग किया जाता है। 
(8)- Polyester:- यह एक thermosetting प्लास्टिक पदार्थ है। इसके द्वारा बनायी गयी चीजों को पुनः गर्म करके नया आकार नहीं दिया जा सकता है। इसे फाइबर ग्लास के साथ मिलाकर use किया जाता है।
  • Polyester को furniture और कार की बॉडी बनाने मे स्तेमाल किया जाता है। 
  • इसका प्रयोग surface coating और polyester फिल्म मे भी किया जाता है।  

(9)- Polythene:- पॉलिथीन एक अपारदर्शी flexible पदार्थ है। इस पर नमी और रसायन का असर नहीं होता है और इसकी परावैधुत और प्रतिरोधकता उच्च होती है। यह कम परावैधुत हानी वाला सस्ता पदार्थ है।

  • पॉलिथीन का प्रयोग चालक और तारों का insulation करने के लिए किया जाता है।
  • इसका प्रयोग उच्च आवृति(frequency) के cable में भी किया जाता है।
  • औध्योगिक क्षेत्रों में packing के लिए इसका प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है।
  • carry bag के रूप में इसका प्रयोग सभी जगह होता है।
(10)- Varnish(वार्निश):-  यह एक प्रकार का तरल पदार्थ है। यदि इसे किसी सतह पर लगाया जाए, तब यह सूखने के बाद सूखने के बाद एक चमकदार पतली परत बना देता है। वार्निश दो प्रकार की होती है।
(a)- Oil varnish:- इसके लिए एक प्रकार के रेजिन को drying oil में मिलाकर बनाया जाता है। यदि तेल की मात्र अधिक राखी जाए तो इसे long varnish कहते हैं, और यदि तेल की मात्र कम कर दी जाए तब इसे short varnish कहते हैं। तेल के सूखने के बाद सतह पर रेजिन की परत रह जाती है, जो की सतह को हवा और नमी से बचाती है। इसे insulation के लिए इलैक्ट्रिक मोटर की winding पर लगाया जाता है। इसे सूखने में 4 से 18 घंटे लगते हैं।
(b)- Spirit varnish:- Spirit वार्निश में oil की जगह तुरंत वाष्प बन कर उड़ जाने वाल पदार्थ मिलाया जाता है। इस प्रकार की वार्निश समान्यतः वायु द्वारा सूख जाती है।
विधुत मोटर में अच्छे result के लिए वार्निश को लगा कर 100° से 110°C पर bake किया जाता है।

  • वार्निश से इन्स्युलेशन में सुधार होता है।
  • सतह पर हवा और नमी का असर नहीं होता है।
  • सतह की चमक बढ़ती है।
  • Mechanical strength बढ़ती है।

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